वाराणसी: नवरात्रि अष्टमी पर काशी में उमड़ी आस्था: मां मंगला गौरी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़
- bharatvarshsamaach
- Mar 26
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रिपोर्टर: नौमेश कुलदीप श्रीवास्तव
लोकेशन: वाराणसी
दिनांक : 26.03.2026
चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर धर्म नगरी काशी में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। वाराणसी के प्रसिद्ध मां मंगला गौरी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जहां भक्तों ने मां के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।
मंगला आरती के बाद गूंजा जयकारा
पंचगंगा घाट के ऊपर स्थित इस प्राचीन मंदिर में सुबह मंगला आरती के बाद जैसे ही पट खोले गए, पूरा परिसर “जय माता दी” के जयघोष से गूंज उठा।
भक्तों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मां से सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की। मंदिर परिसर में भक्ति का माहौल देखते ही बन रहा था।
पौराणिक मान्यता और मंदिर का महत्व
मंदिर के महंत नारायण दास के अनुसार, मां मंगला गौरी मंदिर की स्थापना भगवान सूर्य द्वारा की गई मानी जाती है। यह पवित्र स्थल काशी के आनंदवन और कटिवन की चोटी पर स्थित है।
मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान सूर्य ने कठोर तपस्या की थी, जिसके प्रभाव से निकला पसीना ‘किलना नदी’ के रूप में प्रसिद्ध हुआ। इसके नीचे पवित्र पंचगंगा तीर्थ स्थित है, जो धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
सौभाग्य और मंगल की देवी हैं मां मंगला गौरी
महंत ने बताया कि मां मंगला गौरी को सौभाग्य और मंगल की देवी माना जाता है। विशेष रूप से व्रती महिलाएं नवरात्र के दौरान यहां दर्शन के लिए पहुंचती हैं और मां से अपने परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।
सालभर भी यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, जहां लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं।
मनोकामना पूर्ण होने की मान्यता
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां मंगला गौरी के दर्शन मात्र से विवाह में आ रही बाधाएं दूर हो जाती हैं। श्रद्धालु 5, 7 या 14 मंगलवार तक विशेष पूजा और कुमकुम अर्चन कर अपनी मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं।
निष्कर्ष
नवरात्रि की अष्टमी पर मां मंगला गौरी मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ यह दर्शाती है कि काशी में आस्था और परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ जीवित है। यहां की धार्मिक मान्यताएं और भक्तों का विश्वास इस पवित्र स्थल को और भी खास बनाता है।
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भारतवर्ष समाचार ब्यूरो
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