बलरामपुर: एकतरफा प्यार का खौफनाक अंत: नाबालिग छात्रा की हत्या के दोषी को उम्रकैद
- bharatvarshsamaach
- 2 days ago
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रिपोर्ट: योगेंद्र त्रिपाठी
लोकेशन: बलरामपुर
दिनांक : 11 फरवरी 2026
बलरामपुर, उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जनपद में एकतरफा प्रेम की सनक में की गई 16 वर्षीय छात्रा की निर्मम हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पुलिस की प्रभावी जांच, वैज्ञानिक साक्ष्यों और मजबूत पैरवी के चलते महज एक वर्ष, एक माह और 25 दिन के भीतर मामले का निस्तारण हो सका। न्यायालय के इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए न्याय और समाज के लिए एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
14 दिसंबर 2024 को हुई थी घटना
यह दर्दनाक वारदात 14 दिसंबर 2024 की सुबह सामने आई थी। मधु चौहान (16 वर्ष) साइकिल से स्कूल जा रही थी। आरोप है कि रास्ते में पहले से घात लगाकर बैठे धर्मपाल चौहान ने उसे रोक लिया और धारदार हथियार से गला रेतकर उसकी हत्या कर दी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी छात्रा से एकतरफा प्रेम करता था। छात्रा द्वारा उसके प्रस्ताव को अस्वीकार किए जाने से वह आक्रोशित था। हत्या के बाद आरोपी ने अमानवीय व्यवहार करते हुए शव को कंधे पर उठाकर घर की दिशा में ले जाने का प्रयास किया, जिससे क्षेत्र में भय और सनसनी फैल गई। इस भयावह दृश्य को देखकर आसपास मौजूद लोग सहम गए।
वैज्ञानिक साक्ष्यों से मजबूत हुआ केस
पुलिस अधीक्षक बलरामपुर विकास कुमार के निर्देशन में मामले की गहन विवेचना की गई। ‘ऑपरेशन कनविक्शन’ के तहत त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने घटनास्थल से आरोपी के खून से सने कपड़े और हत्या में प्रयुक्त छुरी बरामद की। फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) जांच में डीएनए मिलान सफल रहा, जिसने आरोपी के खिलाफ मजबूत वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध कराए।
न्यायालय में अभियोजन पक्ष ने कुल नौ गवाह पेश किए। इनमें एक नाबालिग प्रत्यक्षदर्शी का बयान अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुआ, जिसने घटना के समय आरोपी को मौके पर देखा था। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।
अदालत का फैसला
अभियोजन पक्ष ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मृत्युदंड की मांग की थी। हालांकि न्यायालय ने आरोपी की आयु सहित अन्य परिस्थितियों पर विचार करते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दो लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। इसमें से डेढ़ लाख रुपये पीड़ित परिवार को प्रदान किए जाएंगे।
समाज के लिए संदेश
यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय लेकर आया है, बल्कि समाज में यह स्पष्ट संदेश भी देता है कि एकतरफा प्रेम या व्यक्तिगत आक्रोश के नाम पर की गई हिंसा को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस की तत्परता, वैज्ञानिक जांच और प्रभावी पैरवी ने यह साबित किया कि मजबूत साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों को कानून के दायरे में लाया जा सकता है।
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भारतवर्ष समाचार ब्यूरो
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