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एकाना स्टेडियम की अव्यवस्था बनी जनता की मुसीबत: पार्किंग अधूरी, ट्रैफिक जाम से लखनऊ बेहाल

  • bharatvarshsamaach
  • Dec 10, 2025
  • 2 min read


 लेखक: शिखर, अधिवक्ता,  
 लेखक: शिखर, अधिवक्ता,  

 भारतवर्ष समाचार  ब्यूरो

 लोकेशन – उच्च न्यायालय लखनऊ पीठ

 दिनांक : 10 दिसम्बर 2025


लखनऊ की पहचान बन चुके भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी एकाना क्रिकेट स्टेडियम ने शहर को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान तो दिलाई, लेकिन नागरिक सुविधाओं के नाम पर यह परियोजना आज प्रशासनिक लापरवाही की मिसाल बनती जा रही है। हर बड़े क्रिकेट मैच, सांस्कृतिक कार्यक्रम या वीआईपी इवेंट के दौरान शहीद पथ से लेकर आसपास की आवासीय कॉलोनियों तक घंटों लंबा ट्रैफिक जाम लगना अब आम बात हो गई है।


जाम में फँसती ज़िंदगी, ठप होती व्यवस्था

मैच के दिन सड़कें पूरी तरह जाम हो जाती हैं। वाहन रेंगते नज़र आते हैं, स्कूली बच्चे, बुज़ुर्ग और महिलाएँ घंटों गाड़ियों में फँसे रहते हैं। कई बार एम्बुलेंस तक समय पर नहीं निकल पाती, जिससे गंभीर मरीजों की जान पर बन आती है। पुलिस और ट्रैफिक कर्मियों की मौजूदगी के बावजूद हालात बेकाबू बने रहते हैं। सवाल साफ है—जब स्टेडियम की क्षमता हजारों दर्शकों की है, तो पार्किंग की समुचित व्यवस्था क्यों नहीं?


पार्किंग योजना काग़ज़ों में, ज़मीन पर सन्नाटा

स्थानीय निवासियों का कहना है कि एकाना स्टेडियम के निर्माण के समय पार्किंग को लेकर बड़े-बड़े वादे किए गए थे। कई बार “निर्माण जल्द शुरू होगा” जैसे आश्वासन भी दिए गए, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी पार्किंग परियोजना अधूरी पड़ी है। नतीजतन, दर्शकों की गाड़ियाँ सड़कों, सर्विस लेन और रिहायशी इलाकों में खड़ी हो जाती हैं, जिससे पूरा इलाका ठप पड़ जाता है।


जनता भुगत रही कीमत, जिम्मेदार बेपरवाह

यह सिर्फ ट्रैफिक की समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का जीवंत उदाहरण है। जिस स्टेडियम को आधुनिक सुविधाओं का प्रतीक बताया गया था, वह आज राजधानी की यातायात व्यवस्था पर भारी पड़ रहा है। आयोजक, विकास प्राधिकरण और प्रशासन—तीनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या करोड़ों की परियोजना को बिना जरूरी बुनियादी सुविधाओं के ही हरी झंडी दे दी गई?


जनहित याचिका: अब अदालत से ही उम्मीद

स्थानीय नागरिकों, समाजसेवियों और अधिवक्ताओं का मानना है कि अब केवल आश्वासन काफी नहीं हैं। जब लगातार शिकायतों और मीडिया रिपोर्ट्स के बावजूद स्थिति नहीं सुधरती, तो न्यायालय ही अंतिम सहारा बचता है। जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से यह मांग उठाई जा रही है कि—

  • पार्किंग निर्माण को तय समयसीमा में पूरा किया जाए

  • हर बड़े इवेंट से पहले वैकल्पिक और व्यवस्थित पार्किंग सुनिश्चित हो

  • यातायात प्रबंधन की जिम्मेदारी तय की जाए


न्याय की लड़ाई ज़रूरी

यह मुद्दा केवल एक स्टेडियम तक सीमित नहीं, बल्कि राजधानी लखनऊ के नागरिक अधिकारों से जुड़ा है। रोज़मर्रा की ज़िंदगी में होने वाली यह परेशानी जनता के साथ अन्याय है। जब प्रशासन मौन हो और अव्यवस्था सामान्य बन जाए, तब लोकतंत्र में सवाल उठाना ज़रूरी हो जाता है।


अब देखना यह है कि क्या समय रहते जिम्मेदार जागेंगे या नागरिकों को अपनी सुविधा और सुरक्षा के लिए अदालत की शरण लेनी पड़ेगी।


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 भारतवर्ष समाचार  ब्यूरो

 संपर्क: 9410001283

 वेबसाइट: www.bharatvarshsamachar.org



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