मुज़फ़्फ़रनगर हिंसा मामले में आरोपियों के बरी होने पर कांग्रेस नेता शाहनवाज़ आलम का बयान
- bharatvarshsamaach
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रिपोर्टर: मोहम्मद कलाम कुरैशी, झांसी
दिनांक : 26 फरवरी 2026
लोकेशन: लखनऊ
मुज़फ़्फ़रनगर सांप्रदायिक हिंसा मामले में आरोपियों के बरी होने पर कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे न्याय व्यवस्था के साथ मज़ाक़ बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अभियोजन पक्ष ने सरकार के दबाव में आकर मामले की मजबूत पैरवी नहीं की, जिसके कारण आरोपियों को बरी कर दिया गया।
अभियोजन की कमजोर पैरवी पर उठाए सवाल
जारी प्रेस विज्ञप्ति में शाहनवाज़ आलम ने कहा कि कुटबा गांव में 8 लोगों की हत्या के मामले में सभी 37 आरोपियों का बरी होना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की मौजूदा स्थिति को देखते हुए ऐसे फैसलों पर आश्चर्य नहीं किया जा सकता, क्योंकि अभियोजन पक्ष की भूमिका संदिग्ध रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में मुज़फ़्फ़रनगर के एक अन्य मामले में मोहम्मदपुर रायसिंह गांव में रईसुद्दीन की हत्या के सभी 22 आरोपियों को भी अदालत ने बरी कर दिया था, जिससे ऐसे मामलों में एक पैटर्न दिखाई देता है।
गवाहों पर दबाव का आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इस मामले में कई आरोपी जमानत पर बाहर थे, जिससे वे आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर गवाहों को प्रभावित करने और डराने-धमकाने में सक्षम रहे। उन्होंने कहा कि इससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
निष्पक्ष जांच की मांग
शाहनवाज़ आलम ने कहा कि मुज़फ़्फ़रनगर हिंसा की सच्चाई तभी सामने आएगी, जब पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच कराई जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंसा से जुड़े घटनाक्रम और उससे पहले की गतिविधियों की गंभीरता से जांच की आवश्यकता है।
न्याय और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की अपील
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि ऐसे संवेदनशील मामलों में निष्पक्ष जांच और प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जाए, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और न्याय व्यवस्था में लोगों का विश्वास बना रहे।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी न्याय, संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक सौहार्द की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इस मुद्दे को लेकर आगे भी अपनी आवाज़ उठाती रहेगी।
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भारतवर्ष समाचार ब्यूरो
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