मुरादाबाद: आरटीई से पूर्व नियुक्त शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता के विरोध में किया प्रदर्शन
- bharatvarshsamaach
- Feb 26
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संवाददाता: मनोज कुमार
लोकेशन: मुरादाबाद
तारीख: 26 फरवरी 2026
मुरादाबाद में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता के विरोध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले बड़ी संख्या में शिक्षकों ने एकत्र होकर सरकार से राहत देने की मांग की।
दरअसल, उत्तर प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 27 जुलाई 2011 से लागू किया गया था। अधिनियम के तहत इस तिथि के बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया था, जबकि इससे पहले नियुक्त शिक्षकों को इस शर्त से मुक्त रखा गया था।
लेकिन 1 सितंबर 2025 को माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद देशभर में आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए भी सेवा में बने रहने और पदोन्नति हेतु टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक कर दिया गया है।
शिक्षकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति उस समय हुई थी जब टीईटी की कोई अनिवार्यता नहीं थी। ऐसे में वर्षों की सेवा के बाद यह शर्त लागू करना उनके साथ अन्याय है। इससे हजारों शिक्षकों की नौकरी और पदोन्नति पर संकट उत्पन्न हो सकता है।
धरना प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में मांग की गई कि आरटीई से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट देने के लिए अध्यादेश लाया जाए और संसद के माध्यम से कानून बनाकर उन्हें राहत प्रदान की जाए।
शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उनका कहना है कि वे लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और उनके अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए।
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