झांसी | संभल हिंसा पर कांग्रेस का हमला, अनुज चौधरी पर एफआईआर की मांग
- bharatvarshsamaach
- Jan 17
- 3 min read

रिपोर्टर: मोहम्मद कलाम कुरैशी, झांसी
लोकेशन : झांसी, उत्तर प्रदेश
दिनांक : 16 जनवरी 2026
जारीकर्ता:
शाहनवाज़ आलम
सचिव, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी
संभल प्रकरण को लेकर गुरुवार को कांग्रेस नेताओं ने प्रेस क्लब में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव शाहनवाज़ आलम ने कहा कि संभल के सीजेएम न्यायालय का हालिया आदेश सरकार द्वारा कराई गई मजिस्ट्रेटी जांच पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है, क्योंकि इस जांच में पुलिस को बचाने के उद्देश्य से क्लीन चिट दी गई थी।
शाहनवाज़ आलम ने मांग की कि संभल पुलिसिया हिंसा की जांच हाईकोर्ट के न्यायाधीश से न्यायिक जांच के ज़रिए कराई जाए। साथ ही, न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित होने से बचाने के लिए तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी और एसएचओ अनुज तोमर को निलंबित कर जेल भेजा जाए।
उन्होंने कहा कि पुलिस इस पूरे मामले में तीन ऐसे सवाल उठा रही है, जो पूरी तरह तथ्यहीन और तर्कहीन हैं।पहला, पुलिस का यह दावा कि उपद्रव 7:45 बजे से पहले शुरू हो गया था और पीड़ित 8 बजे घटनास्थल पर कैसे पहुंचा। शाहनवाज़ आलम ने इसे तकनीकी बहाना बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से पुलिस सच्चाई छिपाना चाहती है।
दूसरा, पुलिस द्वारा मीडिया ट्रायल के ज़रिए पीड़ित पर पहचान छिपाकर इलाज कराने का आरोप लगाया जा रहा है, जबकि पीड़ित के पिता यामीन ने कोर्ट में बताया कि पुलिस के दबाव के कारण आसपास के जिलों में किसी भी अस्पताल ने घायल को भर्ती नहीं किया। मजबूरी में उसे अपनी पहचान छिपाकर मेरठ में इलाज कराना पड़ा। यह स्थिति यूपी में पुलिस हिंसा के शिकार लोगों की भयावह हकीकत को उजागर करती है।
पीड़ित ने कोर्ट को यह भी बताया कि दिसंबर 2024 में उसने पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायत दी थी और 1 जनवरी 2025 को संभल एसएसपी, डीआईजी मुरादाबाद, डीजीपी उत्तर प्रदेश और मुख्यमंत्री को भी प्रार्थना पत्र भेजा, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसके बाद फरवरी में उसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173(4) के तहत अदालत की शरण लेनी पड़ी।
तीसरा, पुलिस का यह दावा कि पीड़ित के शरीर से निकली गोली 7.65 एमएम (32 बोर) की थी, जिसे पुलिस इस्तेमाल नहीं करती। शाहनवाज़ आलम ने कहा कि यह दावा स्वयं इस बात की पुष्टि करता है कि पुलिस ने आंदोलनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग में आरएसएस से जुड़े बाहरी अराजक तत्वों का सहारा लिया, जो पुलिस की वर्दी में निजी हथियारों से गोली चला रहे थे।
उन्होंने कहा कि इसी तरह का तरीका बिजनौर और अन्य जिलों में CAA-NRC आंदोलन के दौरान अपनाया गया था, जिसकी स्वीकारोक्ति स्वयं बिजनौर के तत्कालीन एसएसपी संजीव त्यागी ने एक पत्रिका को दिए साक्षात्कार में की थी।
शाहनवाज़ आलम ने यह भी मांग की कि सीओ अनुज चौधरी और एसएचओ अनुज तोमर की संपत्ति की जांच कराई जाए, क्योंकि संभल हिंसा में नाम जोड़ने-हटाने के नाम पर अवैध वसूली की चर्चाएं आम हैं।
प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अनिल यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पुलिस की सांप्रदायिकता अब व्यक्तिगत आचरण नहीं रह गई है, बल्कि सत्ता के संरक्षण में एक संस्थागत रूप ले चुकी है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान की कड़ी आलोचना की, जिसमें उन्होंने अनुज चौधरी का बचाव किया था।
अनिल यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह कहना कि “वह पहलवान रहा है, तो पहलवानी की भाषा बोलेगा” पुलिस को कानून से ऊपर रखने का प्रयास है। पुलिस कोई सत्ता का लठैत नहीं, बल्कि एक संवैधानिक संस्था है, जिससे संयम और निष्पक्षता की अपेक्षा की जाती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि योगी सरकार नहीं चाहती कि अनुज चौधरी जैसे अधिकारी किसी भी न्यायिक प्रक्रिया में फँसें, क्योंकि ऐसा होने पर उनके राजनीतिक संरक्षकों की भूमिका भी उजागर हो जाएगी।
कांग्रेस नेताओं ने आशंका जताई कि कार्यपालिका के दबाव से न्यायिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। इसी कारण संभल के सीजेएम विभांशु सुधीर को विशेष सुरक्षा प्रदान किए जाने की मांग की गई।
प्रेस कॉन्फ़्रेंस का संचालन शहर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. शहज़ाद आलम ने किया। इस अवसर पर ओबीसी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव, अल्पसंख्यक कांग्रेस नेता अख़्तर मलिक, मसूद ख़ान, हम्माम वहीद, नावेद नक़वी, हरनाम सिंह, उमैर अहमद, अनीस अख़्तर मोदी, अजय वर्मा, मनीष जायसवाल, रामचंद्र राम, सलमान क़ादिर, सलमान ज़िया, दानिश सहित अनेक कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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