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भारत की कर-व्यवस्था में सुधार अनिवार्य: जटिलता, अस्थिरता और छोटे व्यवसायियों पर बढ़ते बोझ की चुनौती”

  • bharatvarshsamaach
  • Dec 2, 2025
  • 3 min read

 लेखक: शिखर, अधिवक्ता,  
 लेखक: शिखर, अधिवक्ता,  

भारतवर्ष समाचार  ब्यूरो

लोकेशन – उच्च न्यायालय लखनऊ पीठ

दिनांक : 02 दिसम्बर 2025


भारत एक उभरती वैश्विक अर्थव्यवस्था है, लेकिन इसकी कर-व्यवस्था आज भी जटिल, बहु-परत और असमान है। पारदर्शिता और स्थिरता की कमी ने न केवल निवेश और कारोबारी माहौल को प्रभावित किया है, बल्कि नागरिकों और छोटे व्यवसायियों के भरोसे को भी कमजोर किया है। इस स्थिति में क़ानून, नीति और प्रशासन तीनों स्तरों पर सुधार की सख्त आवश्यकता है।


1. कर-संरचना की जटिलता

भारतीय कर-व्यवस्था (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों) में कई प्रावधान ऐसे हैं जो आम नागरिक या छोटे व्यवसायी के लिए अत्यधिक पेचीदा हैं:

  • आयकर अधिनियम, 1961 में 300+ धाराएँ, नियम, अपवाद और कटौतियाँ हैं, जिनका व्यावहारिक अनुपालन कठिन है।

  • अलग-अलग फॉर्म, टीडीएस नियम, एडवांस टैक्स और नोटिस प्रक्रिया करदाताओं पर भारी बोझ डालते हैं।

  • GST कानून को “वन नेशन, वन टैक्स” कहा गया, लेकिन इसमें कई रेट स्लैब, इनपुट टैक्स क्रेडिट विवाद और बार-बार के संशोधन इसे अस्थिर बनाते हैं।

इस जटिलता का असर छोटे व्यवसायियों पर पड़ता है और संविधान के आर्टिकल 14 (समानता) और आर्टिकल 19(1)(g) (व्यवसाय करने की स्वतंत्रता) की भावना के विपरीत है।

2. बार-बार संशोधन और कर स्थिरता का अभाव

  • कर कानूनों में लगातार संशोधन व्यापारिक माहौल में अनिश्चितता पैदा करते हैं।

  • विदेशी निवेशकों और स्टार्टअप्स के लिए यह संकेत देता है कि भारत में टैक्स नीति स्थिर नहीं है।

  • स्थिर कर नीति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूल-ऑफ़-लॉ के आधार पर जरूरी मानी जाती है।


3. राजस्व का भार सीमित करदाताओं पर

  • भारत में 140+ करोड़ की आबादी में केवल 7–8 करोड़ लोग आयकर रिटर्न भरते हैं।

  • इनमें से केवल 1.5–2 करोड़ लोग ही वास्तविक रूप से टैक्स देते हैं।

  • इस वजह से सरकार को अप्रत्यक्ष करों (GST, एक्साइज) पर अधिक निर्भर रहना पड़ता है, जो आम जनता पर समान रूप से बोझ डालता है।

यह स्थिति आर्टिकल 265 (“नो टैक्स विदाउट अथॉरिटी ऑफ़ लॉ”) की भावना और समानता के सिद्धांत के विपरीत है।

4. कर प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी

हालाँकि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने “फ़ेसलेस असेसमेंट” जैसी योजनाएँ शुरू की हैं, फिर भी कई समस्याएँ बनी हुई हैं:

  • नोटिस में स्पष्ट कारणों का अभाव

  • लंबा अपील चक्र (CIT(A) → ITAT → HC → SC)

  • विभागीय विवादों में देरी

  • भ्रष्टाचार की आशंका

नेचुरल जस्टीस के सिद्धांत अक्सर कमजोर पड़ जाते हैं, जिससे करदाताओं का भरोसा कम होता है।

5. जीएसटी कानून में संरचनात्मक खामियाँ

  • इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) पर कड़े नियम और छोटी गलतियों पर पूरा ITC रोकना

  • कई स्लैब (0%, 5%, 12%, 18%, 28%) नीति की स्पष्टता को कमजोर करते हैं

  • ई-वे बिल, रिवर्स चार्ज, GST R-3B और वार्षिक रिटर्न की जटिलता छोटे व्यापारियों पर प्रशासनिक बोझ बनती है

  • GST अपीलेट ट्रिब्यूनल की अनुपलब्धता से लाखों मामले लंबित हैं

इससे संविधान के आर्टिकल 39A (निःशुल्क एवं त्वरित न्याय) के सिद्धांत का उल्लंघन होता है।

सरकार को करने चाहिए 10 कानूनी सुधार

  1. कर कानूनों का व्यापक सरलीकरण – इनकम टैक्स एक्ट 1961 को सरल बनाकर नया डायरेक्ट टैक्स कोड लागू करें।

  2. स्थिर और दीर्घकालिक टैक्स नीति – हर 5–10 साल की स्थायी नीति।

  3. टैक्स स्लैब और कटौतियों का एकीकरण – GST स्लैब कम करें, आयकर छूट सीमित करें।

  4. GST अपीलेट ट्रिब्यूनल की त्वरित स्थापना – लंबित मामलों में तेजी लाने के लिए।

  5. नेचुरल जस्टीस का पालन – नोटिस में स्पष्ट आरोप, सुनवाई का पूरा अवसर और रीज़ंड ऑर्डर अनिवार्य करें।

  6. स्मार्ट तकनीक का उपयोग – AI आधारित निगरानी और गलत बिलिंग रोकने के लिए।

  7. ईज़ ऑफ़ कंप्लायंस मिशन – सरल मासिक/त्रैमासिक रिटर्न, छोटे कारोबारियों के लिए उच्च Audit सीमा, ऑनलाइन सहायता केंद्र।

  8. प्रत्यक्ष कर आधार बढ़ाना – नए करदाताओं को जोड़ने और अप्रत्यक्ष करों पर निर्भरता कम करने के लिए।

  9. कर विवाद समाधान तंत्र को मजबूत करना – स्थायी और प्रणालीगत सुधार लागू करें।

  10. कर प्रशासन में जवाबदेही कानून – गलत नोटिस या अनुचित आदेश पर कानूनी जवाबदेही तय करें।


निष्कर्ष

भारत की कर-व्यवस्था अभी भी असमान, जटिल और अस्थिर है। जब तक कानून सरल, पारदर्शी और न्यायपूर्ण नहीं होंगे, तब तक करदाता सरकार पर भरोसा नहीं करेंगे और निवेश की गति प्रभावित होती रहेगी।


सुधार की सबसे बड़ी जरूरत है: “कानून आधारित स्थिरता + प्रशासनिक पारदर्शिता + करदाताओं के प्रति सम्मान”


सरकार को कर प्रणाली को “भय आधारित” नहीं बल्कि “सहयोग आधारित” बनाना होगा, तभी भारत विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनने का सपना साकार कर सकेगा।


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 भारतवर्ष समाचार  ब्यूरो

 संपर्क: 9410001283

 वेबसाइट: www.bharatvarshsamachar.org

 
 
 

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