top of page

मानवाधिकार आयोग को संवैधानिक दर्जा: समय की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक आवश्यकता

  • bharatvarshsamaach
  • Dec 8, 2025
  • 3 min read

 लेखक: शिखर, अधिवक्ता,  
 लेखक: शिखर, अधिवक्ता,  


 भारतवर्ष समाचार  ब्यूरो

 लोकेशन – उच्च न्यायालय लखनऊ पीठ

 दिनांक : 08 दिसम्बर 2025


भारतीय लोकतंत्र की आत्मा नागरिकों के मौलिक अधिकारों में निहित है। संविधान का भाग–III प्रत्येक नागरिक को राज्य और उसकी एजेंसियों की मनमानी, दमन या अत्याचार से सुरक्षा का भरोसा देता है। किंतु जमीनी हकीकत यह है कि अधिकारों का उल्लंघन आज भी एक कड़वी सच्चाई है और न्यायिक प्रक्रिया की लंबाई अक्सर पीड़ित को त्वरित राहत से वंचित कर देती है। ऐसे में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और राज्य मानवाधिकार आयोगों की भूमिका अत्यंत निर्णायक हो जाती है।


विडम्बना यह है कि मानवाधिकार संरक्षण जैसी संवेदनशील जिम्मेदारी निभाने वाला आयोग आज भी संवैधानिक नहीं, बल्कि केवल वैधानिक संस्था है—जो मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत गठित है। सवाल उठता है: क्या यह स्थिति पर्याप्त है?


मानवाधिकार आयोग: सीमित शक्तियों वाली संस्था

मानवाधिकार आयोग का उद्देश्य मानवाधिकारों की रक्षा, उल्लंघनों की जांच और सिफारिशें देना है। लेकिन इसकी प्रमुख सीमाएँ स्पष्ट हैं—

  • आयोग की सिफारिशें बाध्यकारी नहीं होतीं

  • राज्य एजेंसियाँ अक्सर उन्हें अनदेखा कर देती हैं

  • आयोग के पास दंडात्मक शक्तियों का अभाव है

परिणामस्वरूप, कई बार गंभीर उल्लंघनों में भी आयोग की रिपोर्ट कागज़ों तक ही सिमट जाती है।


भारत में मानवाधिकार उल्लंघन: एक कड़वी सच्चाई

देश में मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाएँ अनेक रूपों में सामने आती हैं, जैसे—

  • पुलिस हिरासत में अत्याचार व मृत्यु

  • दलितों और अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव

  • महिलाओं के विरुद्ध हिंसा

  • कैदियों के अधिकारों का हनन

  • आतंकवाद या उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों की समस्याएँ

  • मीडिया की स्वतंत्रता पर दबाव

  • साइबर उत्पीड़न और भीड़ हिंसा


इनमें से अधिकांश मामलों में राज्य की कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ ही आरोपों के घेरे में होती हैं। ऐसे मामलों में स्वतंत्र, प्रभावी और निष्पक्ष जांच के लिए आयोग को वास्तविक शक्ति देना अनिवार्य है।


संवैधानिक दर्जा क्यों जरूरी है?

यदि मानवाधिकार आयोग को संवैधानिक संस्था का दर्जा दिया जाता है, तो इसके दूरगामी लाभ होंगे—

1. वास्तविक स्वतंत्रता

संवैधानिक दर्जा मिलने पर आयोग कार्यपालिका की दया पर निर्भर नहीं रहेगा—चाहे वह फंडिंग हो, नियुक्ति प्रक्रिया या प्रशासनिक नियंत्रण।

2. बाध्यकारी निर्णय

आयोग के आदेशों को कानूनी बल मिलेगा और राज्य एजेंसियाँ उन्हें नज़रअंदाज़ नहीं कर पाएंगी।

3. निष्पक्ष और प्रभावी जांच

पुलिस और प्रशासन के विरुद्ध मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप घटेगा और जवाबदेही बढ़ेगी।

4. अधिकारों की सशक्त न्यायिक सुरक्षा

संवैधानिक संस्था होने से आयोग के निर्णय न्यायालयीय समीक्षा के योग्य होंगे, लेकिन उन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकेगा।

5. अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भारत

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार मानकों के अनुरूप भारत की प्रतिबद्धता और मजबूत होगी।


मौजूदा व्यवस्था की बड़ी चुनौतियाँ

आज की प्रणाली में कई समस्याएँ हैं—

  • सिफारिशें मानना अनिवार्य नहीं

  • दंडात्मक शक्तियों का अभाव

  • राजनीतिक नियुक्तियों की आशंका

  • मामलों का भारी बोझ

  • सीमित संसाधन

इन कारणों से आयोग की प्रभावशीलता सीमित रह जाती है।


संवैधानिक दर्जा कैसे दिया जा सकता है?

इसके लिए तीन व्यावहारिक रास्ते हो सकते हैं—

  1. संविधान में नया अनुच्छेद जोड़कर

  2. अनुच्छेद 338/338A की तर्ज पर विशेष प्रावधान बनाकर

  3. मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम में व्यापक संशोधन

हालाँकि, स्थायी और प्रभावी समाधान के लिए संवैधानिक संशोधन ही सबसे उपयुक्त विकल्प प्रतीत होता है।


विरोध के तर्क और उनका उत्तर

यह कहा जाता है कि—

  • इससे न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच टकराव हो सकता है

  • अतिरिक्त संसाधनों और खर्च का बोझ बढ़ेगा


लेकिन लोकतंत्र में नागरिकों के अधिकारों की रक्षा किसी भी खर्च से बड़ी प्राथमिकता है। अधिकार सुरक्षित होंगे, तभी शासन विश्वसनीय बनेगा।


निष्कर्ष

भारतीय लोकतंत्र की सार्थकता तभी है, जब प्रत्येक नागरिक सम्मान, स्वतंत्रता और सुरक्षा के साथ जीवन जी सके। राज्य का कर्तव्य केवल शासन चलाना नहीं, बल्कि मानव गरिमा की रक्षा करना है।


मानवाधिकार आयोग को संवैधानिक दर्जा देना कोई साधारण सुधार नहीं, बल्कि भारत की मानवाधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक होगा। यह समय की मांग है कि संसद ठोस संवैधानिक कदम उठाकर आयोग को वास्तविक शक्ति, स्वतंत्रता और प्रभावशीलता प्रदान करे—ताकि भारत एक अधिक न्यायपूर्ण, उत्तरदायी और मानवोचित लोकतंत्र के रूप में आगे बढ़ सके।


  ⸻


 भारतवर्ष समाचार  ब्यूरो

 संपर्क: 9410001283

 वेबसाइट: www.bharatvarshsamachar.org


Comments


Top Stories

bottom of page