संभल: कभी दंगों का गढ़, आज आस्था और पर्यटन का केंद्र: योगी राज में संभल की नई पहचान
- bharatvarshsamaach
- Jan 2
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रिपोर्टर: प्रदीप मिश्रा, संभल
स्थान: संभल, उत्तर प्रदेश
दिनांक : 02 जनवरी 2026
यूपी का संभल—कभी दंगों, तनाव और सियासी टकराव के लिए जाना जाता था—आज एक नए युग की कहानी बयां कर रहा है। जिस संभल को समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता था, जहां दिवंगत सांसद शफीकुर्रहमान बर्क और उनके पौत्र जियाउर्रहमान बर्क की राजनीतिक पैठ रही, और जहां सपा के कद्दावर नेता इकबाल महमूद विधायक हैं, वही संभल आज विकास, धार्मिक चेतना और पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की दिशा में अग्रसर है।
इतिहास से वर्तमान की यात्रा
24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर विवाद ने संभल को हिंसा और तनाव के दौर से गुजराया। आजादी के बाद से लगभग 15 दंगों का साक्षी रहा यह जिला लंबे समय तक विवादों और सामाजिक तनाव के लिए चर्चा में रहा।
लेकिन अब संभल का चेहरा बदल चुका है। योगी आदित्यनाथ सरकार के कार्यकाल में यह जिला विकास और धार्मिक पर्यटन की नई राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्षों से बदहाल पड़े, विलुप्त हो चुके तीर्थ स्थल, प्राचीन कुएं और कूप अब खोजे और संरक्षित किए जा रहे हैं। इन पर सरकारी योजनाओं के तहत सौंदर्यीकरण और संरक्षण कार्य किए जा रहे हैं, जिससे संभल का नाम धार्मिक और सांस्कृतिक मानचित्र पर दोबारा चमक रहा है।
प्रशासनिक नेतृत्व और बदलाव की कमान
इस बदलाव की जिम्मेदारी संभल प्रशासन ने पूरी मेहनत और समर्पण के साथ उठाई है।
जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पेंसिया और
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (EO) डॉ. मणिभूषण तिवारी
के नेतृत्व में शहर का चेहरा तेजी से बदल रहा है। सड़कें, चौराहे और सार्वजनिक स्थल अब सिर्फ बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संभल की नई पहचान और गौरव की कहानी बयां कर रहे हैं।
मुख्य उदाहरण:
शंकर चौराहे पर स्थापित भगवान परशुराम की भव्य प्रतिमा, जो सनातन परंपरा के गौरव को दर्शाती है।
चौधरी सराय चौराहे पर 101 फीट ऊंचा तिरंगा और अशोक स्तंभ, जो देशभक्ति के जज्बे को उजागर करता है।
मुरादाबाद मार्ग पर शेल्टर होम की दीवारों पर 3D पेंटिंग्स, जिनमें भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस की तस्वीरें हैं।
आने वाले समय में महाराणा प्रताप, अहिल्याबाई होलकर और पृथ्वीराज चौहान की प्रतिमाएं भी स्थापित की जाएंगी। ये प्रतिमाएं केवल मूर्तियां नहीं होंगी, बल्कि संभल की नई पहचान के प्रतीक बनेंगी।
धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन की दिशा
85 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले संभल में जिस तरह से सनातन परंपरा और राष्ट्रीय प्रतीकों को सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित किया जा रहा है, वह स्पष्ट संकेत देता है कि संभल अब केवल राजनीतिक या धार्मिक विवादों से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक गौरव और पर्यटन की नई दिशा से पहचाना जाएगा।
EO नगर पालिका डॉ. मणिभूषण तिवारी के अनुसार:"संभल को अब सिर्फ अतीत के विवादों से नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक विरासत और विकास से पहचाना जाएगा। हमारा लक्ष्य है कि संभल धार्मिक और पर्यटन के नक्शे पर एक मजबूत स्थान बनाए। तीर्थों का संरक्षण, सौंदर्यीकरण और राष्ट्रपुरुषों की स्मृतियों को जीवित रखना—यह सब उसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।"
संभल की नई कहानी
कभी विवाद, हिंसा और बदहाली के लिए चर्चित संभल अब विकास, धार्मिक चेतना और पर्यटन की उम्मीद बनकर उभर रहा है। योगी सरकार के इस कार्यकाल में शहर का चेहरा पूरी तरह बदल चुका है।
संभल अब सिर्फ अपने राजनीतिक इतिहास या दंगों के लिए नहीं जाना जाएगा, बल्कि धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक गौरव और आधुनिक विकास की मिसाल के रूप में यूपी का एक मॉडल जिला बनकर उभरा है।
यह बदलाव न केवल जिले के नागरिकों के लिए गौरव की बात है, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए धार्मिक और पर्यटन आधारित विकास का प्रेरणादायक उदाहरण भी बनता जा रहा है।
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भारतवर्ष समाचार ब्यूरो
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