संभल में SP विधायक ने उठाए जनता के मुद्दे, तीर्थ विकास पर कड़ी आपत्ति जताई”
- bharatvarshsamaach
- Nov 30, 2025
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रिपोर्टर: प्रदीप मिश्रा, संभल
स्थान: संभल, उत्तर प्रदेश
दिनांक : 30 नवंबर 2025
संभल। उत्तर प्रदेश के संभल में सियासी गर्मी बढ़ गई है। वजह है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा संभल के 68 तीर्थ स्थलों और 19 कूपों के विकास के लिए 423 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी देना।
सरकार इसे “आस्था और पर्यटन के स्वर्ण युग” के रूप में पेश कर रही है, लेकिन समाजवादी पार्टी के विधायक इक़बाल महमूद का कहना है कि इस तरह का खर्च जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला है।
विधायक का तीखा वार
संभल के मियां सराय स्थित अपने आवास पर इक़बाल महमूद ने मीडिया से कहा—
“भगवान अपने घर का मालिक हैं, उन्हें पैसों की ज़रूरत नहीं। लेकिन जनता के टूटे घर कौन संभालेगा? 423 करोड़ सिर्फ़ तीर्थों पर खर्च करने से जनता की समस्याएँ हल नहीं होंगी।”
उन्होंने आरोप लगाया कि शेरजंग की ज़्यारत के लिए पैसे रिलीज़ हो गए और उद्घाटन लखनऊ में हो चुका है, लेकिन संभल में आज तक एक ईंट भी नहीं लगी। उनका कहना है कि यह केवल दिखावा है, जमीन पर कोई वास्तविक विकास नहीं हुआ।
जनता के मुद्दों को उजागर करते हुए सवाल उठाए
विधायक ने सरकार पर सवाल उठाए कि—
टूटी सड़कें कब बनेंगी?
नौजवानों के लिए रोजगार कहाँ हैं?
कॉलेज और यूनिवर्सिटी की स्थिति क्या है?
किसानों को खाद और बीज कब मिलेगा?
गरीबों को योजनाओं का लाभ कब मिलेगा?
“इन सब मुद्दों पर ध्यान दिए बिना सिर्फ तीर्थ स्थलों पर पैसा खर्च करना विकास नहीं, बल्कि दिखावा है।”
संभल के मेडिकल कॉलेज पर भी निशाना
इक़बाल महमूद ने संभल के PPP मॉडल के मेडिकल कॉलेज पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था—
“अगर यह सरकारी कॉलेज होता तो गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों को सीधे लाभ मिलता। अब केवल राजनीतिक और चुनावी लाभ के लिए बनाया जा रहा है।”
विकास या वोट बैंक?
विधायक ने साफ कर दिया कि सरकार का ध्यान वास्तविक विकास कम और वोट बैंक ज्यादा है।
उन्होंने कहा—
“तीर्थ स्थल सजाओ, लेकिन जनता को भूखा मत छोड़ो। असली विकास वही है, जिसमें नौजवान पढ़े, बेरोजगार को नौकरी मिले और गरीब का पेट भरे।”
सरकार का तर्क और योजना
सरकार के अनुसार—
68 तीर्थ स्थल और 19 कूपों का सौंदर्यीकरण
धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा
स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार में योगदान
हालांकि SP विधायक का कहना है कि स्थानीय जनता के रोज़मर्रा के मुद्दे जैसे सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।
बाइट – इक़बाल महमूद, SP विधायक, संभल
“भगवान को पैसों की ज़रूरत नहीं है, जनता के लिए सरकार का काम जरूरी है।”
निष्कर्ष
संभल में यह मुद्दा दर्शाता है कि विकास और बजट आवंटन केवल बड़ी योजनाओं या धार्मिक स्थलों पर खर्च करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। स्थानीय जनता के रोज़मर्रा के मुद्दों—सड़क, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और गरीबों के कल्याण—पर भी सरकार का ध्यान होना ज़रूरी है।
इक़बाल महमूद का विवादित बयान इस सियासी बहस को और बढ़ा रहा है, और आगामी समय में यह देखना होगा कि सरकार जनता के लिए किन-किन कदम उठाती है।
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भारतवर्ष समाचार ब्यूरो
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