अमरोहा में चकबंदी में भ्रष्टाचार के आरोप, भाकियू (शंकर) का कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन
- bharatvarshsamaach
- 7 days ago
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भारतवर्ष समाचार ब्यूरो
स्थान: अमरोहा, उत्तर प्रदेश
दिनांक : 03 जनवरी 2026
अमरोहा: जनपद अमरोहा में चकबंदी प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और गंभीर अनियमितताओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन (शंकर) ने सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। दोपहर 12 बजे से शुरू हुए इस धरना-प्रदर्शन की अध्यक्षता चौधरी विक्रम पवार ने की, जबकि संचालन प्रधानाचार्य सत्यवीर सिंह द्वारा किया गया।
धरने को संबोधित करते हुए भाकियू (शंकर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी दिवाकर सिंह ने कहा कि जनपद के ग्राम ढक्का में चल रही चकबंदी प्रक्रिया से किसान बेहद आक्रोशित हैं। किसानों का आरोप है कि चकबंदी के दौरान मुख्य मार्ग पर स्थित चकों को हटाकर दूर स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया, जिससे उन्हें भारी असुविधा और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिन चकों पर पहले से ट्यूबवेल लगे हुए थे, वहां किसी अन्य व्यक्ति का चक बना दिया गया। इसके साथ ही लेखपाल पर कुछ लोगों से मिलीभगत कर उनके चकों को चकबंदी से बाहर करने और बिना मौके पर आबादी या बाग होने के बावजूद भूमि को ch-18 दर्शाकर आबादी दिखाने के गंभीर आरोप लगाए गए।
पेड़ों और मकानों को नक्शे में नहीं किया गया दर्ज
धरने में मौजूद जिला अध्यक्ष चौधरी नेमपाल सिंह ने कहा कि कई स्थानों पर मौके पर मौजूद मकान और आबादी को सामान्य भूमि दर्शा दिया गया है, जबकि चकों में लगे आम, अमरूद और शीशम जैसे फलदार व छायादार पेड़ों को नक्शों में दर्ज नहीं किया गया। कुछ किसानों के मुख्य चकों को हटाकर उन्हें उड़ान चक दे दिए गए हैं, जिससे उनकी खेती पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
भूमि नाप और मूल्यांकन में भी गड़बड़ी के आरोप
किसानों ने चकबंदी के दौरान भूमि की नाप में गंभीर गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि जिनकी भूमि मौके पर पूरी थी, नाप के समय उसे कम दर्शाया गया। साथ ही भूमि की वास्तविक मालियत का सही निर्धारण भी नहीं किया गया, जिससे किसानों को सीधा नुकसान हो रहा है।
किसानों का कहना है कि ग्राम ढक्का में करीब 70 से 80 प्रतिशत किसान चकबंदी का विरोध कर रहे हैं और वर्तमान परिस्थितियों में चकबंदी प्रक्रिया को निरस्त किया जाना न्यायहित में आवश्यक है।
केसीसी और बैंकिंग समस्याओं पर भी उठे सवाल
धरने में यह भी मांग की गई कि राजस्व अभिलेखों को चकबंदी विभाग से हटाकर तहसील भेजा जाए, ताकि किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का नवीनीकरण और नए केसीसी बनाए जा सकें। चौधरी नेमपाल सिंह ने आरोप लगाया कि एक वर्ष बीत जाने के बाद भी उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक में लाखों केसीसी लंबित हैं, जिससे किसानों को लगातार उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।
चीनी मिलों में अव्यवस्थाओं का मुद्दा भी उठा
जिला संरक्षक चौधरी धर्मवीर सिंह ने कहा कि शीत लहर के बावजूद चीनी मिलों में रात के समय किसानों के लिए अलाव और चाय की व्यवस्था नहीं की जा रही, वहीं दूसरी ओर किसानों के साथ घटतौली भी की जा रही है।
आंदोलन की चेतावनी
भारतीय किसान यूनियन (शंकर) ने चेतावनी दी कि यदि चकबंदी की अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर किसानों को न्याय नहीं मिला, तो संगठन 7 जनवरी (बुधवार) को कलेक्ट्रेट अमरोहा का घेराव कर आंदोलन करने को मजबूर होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
धरना-प्रदर्शन में नेपाल सिंह, अमित कुमार, सोमवीर सिंह, नरेश खारी, मोजराम पाल, अख्तव, राकेश सिंह, चौधरी सतवीर सिंह, जितेंद्र सिंह मोनू, चौधरी रविंदर सिंह, मास्टर सत्येंद्र सिंह, राजवीर सिंह, जगत सिंह चौहान, अशोक चौधरी, बबीता रानी, रमेश देवी सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
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