छत्तीसगढ़ में ईसाई समुदाय के मुद्दे पर कांग्रेस नेता का न्यायपालिका पर सवाल, बयान से बढ़ी सियासी हलचल
- bharatvarshsamaach
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रिपोर्टर: मोहम्मद कलाम कुरैशी, झांसी
दिनांक : 17 फरवरी 2026
नई दिल्ली,कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने छत्तीसगढ़ में ईसाई समुदाय के खिलाफ कथित हिंसा और बहिष्कार से जुड़े मामलों में न्यायपालिका की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में अदालतों का रवैया चिंता का विषय है और इस पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर जताई आपत्ति
शाहनवाज़ आलम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा छत्तीसगढ़ में ईसाई समुदाय के खिलाफ लगाए गए कथित बहिष्कार और धमकी से जुड़े होर्डिंग्स के मामले में सुनवाई से इनकार करना न्यायिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे प्रभावित समुदायों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा कमजोर होती है।
धार्मिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों का मुद्दा उठाया
कांग्रेस नेता ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन, प्रचार और अंतिम संस्कार अपनी धार्मिक आस्था के अनुसार करने का अधिकार देता है। उन्होंने दावा किया कि छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों में ईसाई समुदाय को धार्मिक गतिविधियों और अंतिम संस्कार तक में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, जो मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
मणिपुर की घटनाओं का भी किया उल्लेख
शाहनवाज़ आलम ने मणिपुर की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि वहां भी धार्मिक और सामाजिक तनाव की घटनाएं सामने आई थीं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में न्यायपालिका की भूमिका निष्पक्ष और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप होनी चाहिए।
अनुच्छेद 32 को बताया संविधान की आत्मा
उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 32 नागरिकों को सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार देता है। उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अनुच्छेद 32 को संविधान की “आत्मा” बताया था और यह नागरिक अधिकारों की रक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है।
न्यायिक निष्पक्षता पर जोर
कांग्रेस नेता ने न्यायपालिका की निष्पक्षता और संवैधानिक जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि सभी समुदायों के अधिकारों की समान रूप से रक्षा होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में न्यायपालिका की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है और इससे आम जनता का विश्वास जुड़ा होता है।
निष्कर्ष:
छत्तीसगढ़ से जुड़े इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता के बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। इस मामले में न्यायपालिका, सरकार और संबंधित पक्षों की भूमिका को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
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भारतवर्ष समाचार ब्यूरो
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