संभल गैंगरेप और जिंदा जलाकर हत्या: चार दोषियों को उम्रकैद और ₹1.12 लाख अर्थदंड
- bharatvarshsamaach
- Dec 20, 2025
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रिपोर्टर: प्रदीप मिश्रा, संभल
स्थान: संभल, उत्तर प्रदेश
दिनांक : 20 दिसम्बर 2025
संभल। जनपद संभल के बहुचर्चित गैंगरेप और जिंदा जलाकर हत्या के जघन्य मामले में अदालत ने सात साल बाद सख्त और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। वर्ष 2018 में 35 वर्षीय महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म कर उसे जिंदा जलाकर मार डालने के मामले में चार आरोपियों को आजीवन कारावास और कुल एक लाख 12 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।
यह फैसला चंदौसी स्थित विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट)/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री अवधेश कुमार सिंह की अदालत ने सुनाया।
क्या है पूरा मामला
मामला थाना रजपुरा क्षेत्र के एक गांव का है। घटना 13 जुलाई 2018 की रात करीब ढाई बजे की है। पीड़िता का पति मजदूरी के सिलसिले में गाजियाबाद गया हुआ था, जबकि महिला अपनी सात वर्षीय बेटी के साथ घर पर अकेली थी। इसी दौरान गांव के ही आराम सिंह, महावीर, कुमार पाल उर्फ भोना, गुल्लू उर्फ जयवीर और एक बाल अपचारी ने घर में घुसकर महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।
हैवानियत की हद पार
दुष्कर्म के बाद पीड़िता ने अपने ममेरे भाई को फोन कर घटना की जानकारी दी। जब आरोपियों को इसकी भनक लगी तो वे दोबारा लौटे और महिला को पास की एक झोपड़ी में ले जाकर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इस अमानवीय कृत्य में महिला की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
मजबूत साक्ष्यों से साबित हुआ अपराध
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता हरिओम प्रकाश उर्फ हरीश सैनी ने बताया कि इस मुकदमे में मृतका का ममेरा भाई और उसकी सात वर्षीय बेटी प्रत्यक्ष गवाह रहे। दोनों की गवाही ने केस को मजबूत आधार दिया।पुलिस ने आरोपियों के कपड़े बरामद कर उन्हें विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा, जहां उन पर सीमेन के निशान पाए गए। इसके अलावा घटनास्थल से पीड़िता का मोबाइल फोन भी बरामद किया गया, जिसमें पीड़िता और उसके ममेरे भाई के बीच हुई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत की गई।
अदालत का फैसला
अदालत ने आराम सिंह, महावीर, कुमार पाल उर्फ भोना और गुल्लू उर्फ जयवीर को भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 376डी, 302, 149, 201 व 34 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और ₹1.12 लाख अर्थदंड की सजा सुनाई।एक आरोपी बाल अपचारी होने के कारण उसका मुकदमा किशोर न्याय बोर्ड में अलग से विचाराधीन है।
न्याय की जीत
इस फैसले को महिला सुरक्षा और न्याय व्यवस्था के लिए एक मजबूत संदेश माना जा रहा है। सात साल बाद आए इस निर्णय से पीड़ित परिवार को न्याय मिला है और समाज में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा मजबूत हुआ है।
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भारतवर्ष समाचार ब्यूरो
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