संभल में 19 नवंबर को उमड़ेगा आस्था का सागर, पहली बार आयोजित होगी विराट हरिहर कोटि परिक्रमा पदयात्रा
- bharatvarshsamaach
- Nov 17, 2025
- 3 min read
रिपोर्टर: प्रदीप मिश्रा, संभल
स्थान: संभल, उत्तर प्रदेश
दिनांक :17 नवंबर 2025
महंत ऋषिराज गिरी बोले— “यह सिर्फ यात्रा नहीं, सनातन जागरण का शंखनाद है
संभल। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में 19 नवंबर को इतिहास रचने जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय हरिहर सेना के संरक्षण में पहली बार विशाल स्तर पर आयोजित की जा रही विराट हरिहर कोटि परिक्रमा पदयात्रा को लेकर शनिवार को कैला देवी धाम में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। महंत ऋषिराज गिरी महाराज ने आगामी यात्रा को सनातन समाज के “आस्था वर्ष” का हिस्सा बताते हुए कहा कि यह आयोजन सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा देने का प्रयास है।
महंत गिरी ने बताया कि हरिहर क्षेत्र सदियों से पवित्रता, प्राकृतिक सौंदर्य और देवत्व का संगम रहा है। उन्होंने कहा—
“जो भी श्रद्धालु यहां परिक्रमा करेगा, भजन करेगा, मन को लगाकर चलेगा— उसका कल्याण निश्चित है। यह भूमि दिव्य है, पवित्र है और सनातन आस्थाओं का केंद्र है।”
कोर्ट में मामला लंबित— यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण और मर्यादित
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे कोर्ट में चल रहे मामले और संभावित विवादों को लेकर सवाल किया गया, तो महंत ऋषिराज गिरी ने स्पष्ट रूप से कहा कि यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण होगी और कोई भड़काऊ गतिविधि नहीं होगी।
उन्होंने कहा—
“हम कोर्ट का सम्मान करते हैं। कोई भड़काऊ नारा नहीं लगेगा, किसी भी समुदाय को आहत करने का हमारा कोई इरादा नहीं। हमारा उद्देश्य धार्मिक परिक्रमा है, राजनीति नहीं।”
उन्होंने यह भी कहा कि पदयात्रा उनका धार्मिक अधिकार है और प्रशासन चाहे तो रोक सकता है, चाहे तो सहयोग कर सकता है।“हमारा काम पदयात्रा निकालना है, प्रशासन का काम सुरक्षा देना है। जो भी दिशा-निर्देश आएंगे, उनका पालन किया जाएगा।”
यात्रा का विस्तृत रूट प्लान घोषित
महंत गिरी ने पूरा रूट विस्तार से बताया।
19 नवंबर को सुबह 10 बजे यात्रा कैला देवी धाम से शुरू होकर—
सारंगपुर
सकरपुर
खिरनी
से होते हुए मोती नगर तक जाएगी, जहां वाहन पार्क किए जाएंगे। यहां से श्रद्धालु लगभग ढाई किलोमीटर पैदल चलकर परकोटि की परिक्रमा करते हुए हरिहर मंदिर पहुंचेंगे और वहीं से वापस कैला देवी धाम लौटकर यात्रा का समापन होगा।
उन्होंने बताया कि संभल में 24 कोसी, 68 तीर्थ परिक्रमा, हरी-हरी कोटि परिक्रमा और गर्भगृह परिक्रमा जैसी प्राचीन परंपराएं पहले भी होती रही हैं, लेकिन इस तरह संगठित और विराट पैमाने की पदयात्रा पहली बार होने जा रही है।
“हरिहर मंदिर था, है और रहेगा” — महंत गिरी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में महंत ऋषिराज गिरी ने अत्यंत दृढ़ स्वर में कहा—
“हमारा संदेश साफ है— हरिहर मंदिर था, हरिहर मंदिर है और हरिहर मंदिर ही रहेगा। मामला कोर्ट में होने के कारण हम सिर्फ परकोटि परिक्रमा कर रहे हैं, मंदिर में प्रवेश नहीं करेंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि 19 नवंबर को यात्रा रखने का कारण यह है कि इसी तारीख को केस दाखिल किया गया था और इसी दिन सर्वे भी कराया गया था। एक वर्ष पूरा होने पर समाज इसे “आस्था वर्ष” के तौर पर मना रहा है।
“यदि जगह विवादित है तो सभी गतिविधियाँ बंद हों
महंत गिरी ने कहा—
“यदि यह स्थल विवादित है तो नमाज़ भी बंद होनी चाहिए। और यदि विवादित नहीं है तो हमें परकोटि परिक्रमा से कैसे रोका जा सकता है? कानून सबके लिए समान है।”
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट पहले ही कई बार सर्वे को सही बता चुका है और सुप्रीम कोर्ट में भी तथ्य ही जीतेंगे।
एक दिन की शांतिपूर्ण पदयात्रा
महंत ऋषिराज गिरी ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण होगी और किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था भंग नहीं की जाएगी।
“हम न कोई कानून तोड़ रहे, न कोई उपद्रव कर रहे। यात्रा सिर्फ धार्मिक है और मर्यादा में पूरी होगी।”
उन्होंने प्रशासन से सहयोग की उम्मीद जताते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
बाइट:महंत ऋषिराज गिरी महाराज, कैला देवी धाम, संभल
⸻
भारतवर्ष समाचार ब्यूरो
संपर्क: 9410001283
वेबसाइट: www.bharatvarshsamachar.org

















Comments