सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच याचिका पर सुनवाई से इनकार किया, शाहनवाज़ आलम ने जताई गंभीर चिंता
- bharatvarshsamaach
- 6 days ago
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रिपोर्टर: मोहम्मद कलाम कुरैशी, झांसी
दिनांक : 16 फरवरी 2026
नई दिल्ली, कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के भड़काऊ भाषणों के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार करने को चिंताजनक बताया है।
शाहनवाज़ आलम ने कहा कि यह कदम अनुच्छेद 32 के उल्लंघन के समान है, जो नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों के हनन पर सीधे सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि अगर गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अनुच्छेद 226 के तहत मुख्यमंत्री के नफ़रत फैलाने वाले बयानों पर स्वतः संज्ञान लिया होता, तो याचिकाकर्ताओं को सुप्रीम कोर्ट जाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को यह भी याद दिलाया कि पूर्व सीजेआई जस्टिस पी.एन. भगवती के ऐतिहासिक फैसले में न्याय प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए पोस्टकार्ड या पत्र के माध्यम से भी याचिका स्वीकार करने का निर्देश दिया गया था। शाहनवाज़ आलम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह कहना कि याचिकाकर्ता हाईकोर्ट के अधिकारों को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं, पूरी तरह अतार्किक है और इससे अनुच्छेद 32 का मूल प्रयोजन ही नकारा जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में सभी राज्यों को निर्देश दिया था कि हेट स्पीच के मामलों में बिना किसी शिकायतकर्ता के इंतजार किए ही सरकारों को स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी होगी। लेकिन असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना की और मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की।
शाहनवाज़ आलम ने न्यायपालिका की दोहरी नीति पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि न्यायपालिका का एक हिस्सा आवारा कुत्तों की स्थिति पर स्वतः संज्ञान ले रहा है, जबकि एक समुदाय के मौलिक अधिकारों के हनन पर चुप्पी साध रही है।
साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री के भड़काऊ बयानों पर स्वतः संज्ञान लेने का अनुरोध किया था। लेकिन सीजेआई का यह कहना कि पत्र लिखना और याचिका दायर करना अलग है, पूर्व फैसलों के खिलाफ है।
शाहनवाज़ आलम ने जोर देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह कदम अनुच्छेद 32 के अधिकारों और संविधान की आत्मा के खिलाफ है। उन्होंने न्यायपालिका से अपील की कि हेट स्पीच और मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के मामलों में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
बाइट:
"अगर हाईकोर्ट ने सीएम के हेट स्पीच पर स्वतः संज्ञान लिया होता, तो याचिकाकर्ताओं को सुप्रीम कोर्ट जाने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती,"— शाहनवाज़ आलम, राष्ट्रीय सचिव, कांग्रेस।
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