झांसी रेलवे स्टेशन की हेरिटेज बिल्डिंग बचाने के लिए खून से लिखा पत्र, प्रधानमंत्री को भेजा जाएगा
- bharatvarshsamaach
- Jan 2
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रिपोर्टर: मोहम्मद कलाम कुरैशी, झांसी
लोकेशन : झांसी, उत्तर प्रदेश
दिनांक : 01 जनवरी 2026
झांसी: झांसी रेलवे स्टेशन की हेरिटेज बिल्डिंग को संरक्षित करने के लिए एक अनूठा और भावनात्मक अभियान चलाया गया। गुरुवार को डा. वृंदावन लाल वर्मा पार्क, किला रोड पर आयोजित हस्ताक्षर अभियान में हजारों लोग शामिल हुए। इस दौरान स्टेशन की पुरानी इमारत की उम्र के बराबर 145 लोगों ने अपने खून से हस्ताक्षर कर प्रधानमंत्री के नाम पत्र लिखा, जिसमें भवन को तोड़कर नई बिल्डिंग बनाने के विरोध की भावनाएं व्यक्त की गईं।
खून से खत में भावनाओं का इजहार
पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने कहा कि झांसी रेलवे स्टेशन केवल ईंट-पत्थर की इमारत नहीं है, बल्कि वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की वीर भूमि और झांसी की वीर परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री को लिखे गए खून के खत के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि विकास चाहिए, लेकिन विरासत के विनाश की कीमत पर नहीं।
बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष भानु सहाय ने कहा कि स्टेशन हमारी स्मृतियों, संघर्ष और स्वाभिमान का प्रतीक है। इसके ऐतिहासिक स्वरूप को मिटाना झांसी के इतिहास के साथ अन्याय होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि झांसी की जनता शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संगठित आंदोलन के माध्यम से इस संदेश को मजबूती से पहुंचाएगी।
बुंदेलखंड क्रांतिदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुं. सत्येंद्र पाल सिंह ने कहा कि स्टेशन के मूल ऐतिहासिक स्वरूप को बचाने के लिए सभी शांतिपूर्ण आंदोलनों में शामिल होंगे और सरकार एवं रेलवे प्रशासन से आग्रह करेंगे कि पुनर्विकास ऐतिहासिक ढांचे को सुरक्षित रखते हुए किया जाए।
प्रजाशक्ति पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पंकज रावत ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत विरोध का नहीं, बल्कि झांसी की आत्मा, अस्मिता और आने वाली पीढ़ियों के अधिकार की रक्षा का आंदोलन है।
आगामी कार्यक्रम
भानु सहाय ने बताया कि अभियान के तहत 2 जनवरी को पूर्वाह्न 11 बजे कचहरी चौराहा पर कलेक्ट्रेट गेट के पास एक और हस्ताक्षर अभियान आयोजित किया जाएगा। इसके बाद 12 बजे प्रतिनिधि मंडल डीआरएम से मिलकर अपने विचार साझा करेगा।
समर्थन में जुटे राजनीतिक और सामाजिक नेता
इस अभियान में आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष अरशद खान, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष योगेन्द्र सिंह पारीछा, मुकेश अग्रवाल, रघुराज शर्मा, राजीव अग्रवाल, मनीराम कुशवाहा, बी एल भास्कर, भरत राय, गौरव जैन, शंभू सेन, पुत्तु कुशवाहा, सीताराम यादव, अखिलेश गुरुदेव, युवराज सिंह यादव, अनिल रिछारिया, अमीर चंद आर्य, शैलेंद्र कुमार शीलू, उत्कर्ष साहू, जगमोहन मिश्रा, एड. चंद्रपाल यादव, हैदर अली, अखलाक मकरानी, अजय जैन, हरिओम श्रीवास, राजकुमार फौजी, राजेन्द्र सेन, मेकालाल भंडारिया, राजू प्रजापति, ब्रजेश राय, हरनारायण श्रीवास्तव, नारायण लाल, नफीस मकरानी, शहनबाज खान, जीतु श्रीवास, प्रतीक नाथ झां, अनिल कश्यप, कार्तिक पटैरिया, उमा चरण वर्मा, प्रशांत भगौरिया, विशाल वर्मा, देवेन्द्र यादव, नंदलाल वर्मा, कमल जैन, सुरेन्द्र श्रीवास, नरेश वर्मा, राहत कुरैशी, चौ. मुहम्मद महमूद, रोवेश खान सहित कई अन्य सामाजिक और राजनीतिक नेता शामिल हुए।
निष्कर्ष
इस आंदोलन के माध्यम से झांसी की जनता ने स्पष्ट कर दिया कि विकास आवश्यक है, लेकिन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नष्ट करने की कीमत पर नहीं। रेलवे स्टेशन की हेरिटेज बिल्डिंग बचाने के लिए उठाया गया यह कदम, झांसीवासियों की चेतना और उनके इतिहास के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक बन गया है।
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भारतवर्ष समाचार ब्यूरो
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